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भारतार्थ – भारतीय राजनीति गहन विचार पर विशेष


पुस्तक समीक्षा -"प्रेम कलश" खण्डकाव्य
समीक्षक - लालबहादुर चौरसिया 'लाल' साहित्यकार एवं कवि महामंत्री - विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई
"प्रेम कलश" पुस्तक आज़मगढ़ जनपद के प्रतिष्ठित कवि श्री रुद्रनाथ चौबे 'रुद्र' जी द्वारा रचित श्रृंगार रस से ओतप्रोत, मनमुग्ध कर देने वाला मनोहारी खण्डकाव्य है। जो कि 'कामायनी प्रकाशन' प्रयागराज से प्रकाशित है। खण्डकाव्य "प्रेम कलश" की विधिवत भूमिका श्रीराम तिवारी 'सहज' जी ने लिखी है, यह बड़े गौरव की बात है। पुस्तक के शीर्षक से ही हमें यह आभास होने लगता है कि यह पुस

Ashok kumar Singh
1 दिन पहले4 मिनट पठन


पुस्तक समीक्षा - "काले अक्षर कविता और कवि" काव्य संग्रह
समीक्षक - लालबहादुर चौरसिया 'लाल'
महामंत्री - विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी, आज़मगढ़ इकाई
"वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान,
उमड़कर आँखों से चुपचाप बही होगी कविता अनजान।"
महाकवि सुमित्रानंदन पंत जी की इन पंक्तियों को जब मैं पढ़ता हूँ और इसकी गहराई में जाता हूँ, तो अनेक कवियों की छाया मेरे अंतःपटल पर अंकित हो उठती है। ऐसे कवि सिर्फ़ समाज के लिए अवतरित होते हैं। समाज की पीड़ा और आह्लाद उनकी कविताओं में निहित होता है। उन्हीं कवियों में एक हैं साहित्यकार श्री

Ashok kumar Singh
3 दिन पहले4 मिनट पठन


पुस्तक समीक्षा : "ऐ नाविक! थोड़ा ठहरो ना"
कवयित्री - सरोज यादव , समीक्षक - लालबहादुर चौरसिया लाल
महामंत्री -विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई
"ऐ नाविक! थोड़ा ठहरो ना" काव्य-संग्रह आज़मगढ़ की प्रतिष्ठित कवयित्री श्रीमती सरोज यादव जी की अनुपम काव्य-कृति ही नहीं, वरन् विविध रंगों के फूलों से सजा एक अनुपम गुलदस्ता है। काव्यानुभूति की व्यापकता से परिपूर्ण कवयित्री सरोज जी की यह पुस्तक लोकमंगल, लोकरंजन व लोकरक्षण से परिपूर्ण मानवीय मूल्यों का उद्बोधन करती है तथा संपूर्ण मानव-जगत को नए-नए आयाम देने के प्रति

Ashok kumar Singh
4 दिन पहले3 मिनट पठन
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