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शिवाजी महाराज जयंती पर भव्य शोभा यात्रा: केसरिया उत्साह, हिंदू एकता का शक्तिशाली प्रदर्शन

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 26
  • 3 min read
 केसरिया साफा पहने श्रद्धालु जय शिवाजी के नारे लगाते हुए। shivaji-jayanti-malleshwaram-bangalore.jpg
 केसरिया साफा पहने श्रद्धालु जय शिवाजी के नारे लगाते हुए। shivaji-jayanti-malleshwaram-bangalore.jpg

भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलुरु। छत्रपति शिवाजी महाराज के 399वें जन्मोत्सव पर मल्लेश्वरम में शिव गर्जना युवा सेना द्वारा निकाली गई भव्य शोभा यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना दिया। काडू मल्लिकार्जुन देवालय से शुरू हुई इस यात्रा का शुभारंभ समाजसेवी महेंद्र मुणोत, भाजपा नेता सप्तगिरि गौड़ा और गणेश राव ने हिंदू ध्वज लहराकर किया। हजारों की संख्या में शामिल श्रद्धालुओं ने “जय भवानी, जय शिवाजी” के उद्घोष के साथ एकता और संस्कृति का संदेश दिया। यह आयोजन हिंदू गौरव, शिवाजी जयंती समारोह और बेंगलुरु धार्मिक आयोजन जैसे प्रमुख कीवर्ड्स को दर्शाता है।


बेंगलुरु के मल्लेश्वरम क्षेत्र में रविवार को उस समय विशेष उत्साह और धार्मिक ऊर्जा का माहौल देखने को मिला, जब शिव गर्जना युवा सेना द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के 399वें जन्म दिवस के अवसर पर विशाल शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। इस भव्य आयोजन की शुरुआत काडू मल्लिकार्जुन देवालय से हुई, जहां से सैकड़ों की संख्या में लोग पारंपरिक परिधान और केसरिया साफा पहनकर शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी महेंद्र मुणोत, भाजपा नेता सप्तगिरि गौड़ा और गणेश राव ने हिंदू ध्वज लहराकर किया। इस दौरान उपस्थित जनसमूह ने “जय भवानी, जय शिवाजी” के जोशीले नारों से वातावरण को गूंजायमान कर दिया। पूरे क्षेत्र में भगवा रंग की छटा और धार्मिक जोश ने एकता और सांस्कृतिक गर्व का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। शोभा यात्रा में विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही, जो इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली बनाती है। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा कर शोभा यात्रा का स्वागत किया गया, वहीं स्थानीय लोगों ने भी इस आयोजन में उत्साहपूर्वक सहयोग किया। शिव गर्जना युवा सेना के अध्यक्ष प्रवीण, उपाध्यक्ष शिव शंकर पवार और मंत्री केशव राव चौहान ने आयोजन की रूपरेखा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को सम्मानित भी किया गया, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और उनके आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि एक कुशल प्रशासक और जननायक भी थे, जिनकी नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक उत्सव था, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का भी प्रतीक बना। वर्तमान समय में जब समाज को एकजुटता और सकारात्मक दिशा की आवश्यकता है, ऐसे आयोजन लोगों में जागरूकता और प्रेरणा का कार्य करते हैं।

आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?

हाल ही में हुए इस आयोजन ने सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर नई चर्चा को जन्म दिया है।

क्या ऐसे आयोजन युवाओं को सही दिशा दे रहे हैं?

क्या यह सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है?

अब आपकी बारी!

इन सभी सवालों पर अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

Q1. शोभा यात्रा कहाँ से शुरू हुई?

Q2. आयोजन किसने किया था?

Q3. मुख्य अतिथि कौन थे?

Q4. आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्या था?

राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार

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