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बेंगलुरु में बारिश का कहर: एक रात में 5 हजार किताबें बर्बाद, बुकशॉप में मची तबाही

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 2 मई
  • 3 मिनट पठन
Heavy rain flood damages thousands of books at Church Street bookstore in Bengaluru
Heavy rain flood damages thousands of books at Church Street bookstore in Bengaluru

भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलुरु। शहर में हुई मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर तबाही का भयावह मंजर दिखाया है। इस बार प्रकृति का प्रकोप सिर्फ सड़कों और घरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ज्ञान के खजाने को भी अपनी चपेट में ले गया। चर्च स्ट्रीट स्थित एक मशहूर इंडिपेंडेंट बुकशॉप ‘द बुकवर्म’ में अचानक आई बाढ़ ने हजारों किताबों को बर्बाद कर दिया। एक ही रात में लगभग 4 से 5 हजार किताबें पानी में भीगकर खराब हो गईं। यह घटना न केवल पुस्तक प्रेमियों के लिए झटका है, बल्कि छोटे व्यवसायों की संवेदनशीलता को भी उजागर करती है।

बारिश इतनी तेज थी कि दुकान के अंदर तक पानी भर गया और अलमारियों में सजी किताबें बहने लगीं। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में किताबें पानी में तैरती नजर आ रही हैं, वहीं दुकान के बाहर ओलों की परत ने हालात की गंभीरता को और भी स्पष्ट कर दिया।

नया स्टॉक भी बर्बाद, बड़ा आर्थिक झटका

दुकान के मालिक कृष्णा ने बताया कि हाल ही में गर्मियों की छुट्टियों को देखते हुए नया स्टॉक मंगवाया गया था। लेकिन अचानक आई इस आपदा ने सारी तैयारी पर पानी फेर दिया। खराब हुई किताबों में बड़ी संख्या नए स्टॉक की है, जिससे आर्थिक नुकसान और भी बढ़ गया है।

उन्होंने कहा, “हमने बड़ी उम्मीदों के साथ किताबें मंगाई थीं, लेकिन एक रात की बारिश ने सब खत्म कर दिया। अब जो किताबें थोड़ी बहुत बची हैं, उन्हें सुखाकर कम कीमत पर बेचने की कोशिश करेंगे।”

रीसायकल पेपर बना नुकसान का कारण?

कृष्णा ने आधुनिक प्रकाशन पद्धति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि आजकल कई प्रकाशक रीसायकल किए गए कागज का उपयोग करते हैं, जिसकी गुणवत्ता कम होती है और वह पानी में जल्दी खराब हो जाता है। इस कारण नुकसान पहले से ज्यादा गंभीर हो गया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी मदद की लहर

घटना की तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की संवेदनाएं उमड़ पड़ीं। कई लोगों ने मदद के लिए आगे आने की इच्छा जताई। कुछ ने अपील की कि लोग दुकान से खराब हुई किताबें खरीदकर इस छोटे व्यवसाय को फिर से खड़ा करने में सहयोग करें।

एक यूजर ने लिखा, “किताबें सिर्फ कागज नहीं होतीं, यह भावनाओं और ज्ञान का संग्रह होती हैं। हम सबको मिलकर इस बुकशॉप को फिर से खड़ा करना चाहिए।”

कोलकाता के ‘वेट बुक फेयर’ की याद

इस घटना ने पिछले साल कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट की बाढ़ की याद दिला दी, जहां ‘वेट बुक फेयर’ का आयोजन किया गया था। उस दौरान हजारों लोगों ने खराब किताबें खरीदकर विक्रेताओं की मदद की थी। अब बेंगलुरु में भी ऐसी ही पहल की उम्मीद की जा रही है।

आपके मन में उठ रहे सवाल

  • क्या शहरों की ड्रेनेज व्यवस्था इतनी कमजोर है कि हर बारिश में बाढ़ जैसे हालात बनते हैं?

  • छोटे व्यापारियों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए क्या कोई ठोस नीति है?

  • क्या प्रकाशन उद्योग को कागज की गुणवत्ता पर पुनर्विचार करना चाहिए?

  • क्या नागरिक स्तर पर ऐसी आपदाओं में सहयोग की संस्कृति को और मजबूत किया जा सकता है?

Q1. कितनी किताबें खराब हुईं?

Q2. यह घटना कहां हुई?

Q3. नुकसान का मुख्य कारण क्या था?

Q4. क्या लोगों ने मदद की पेशकश की है?

Q5. क्या किताबों को बचाया जा सकता है?

✍️ अब आपकी बारी!

इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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