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बेंगलुरु में फिर ट्रैफिक संकट! IOC फ्लाईओवर ध्वस्त, नया रोटरी प्लान

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 6
  • 3 min read
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भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलुरु। बेंगलुरु में ट्रैफिक संकट और गहराने वाला है। शहर के प्रमुख आईओसी जंक्शन फ्लाईओवर को ध्वस्त कर 436 करोड़ रुपये की लागत से नया एलिवेटेड रोटरी फ्लाईओवर बनाने की योजना ने हलचल मचा दी है। यह परियोजना जहां भविष्य में बेहतर कनेक्टिविटी का दावा करती है, वहीं फिलहाल लाखों यात्रियों के लिए भारी जाम और असुविधा का खतरा पैदा हो गया है। खासकर पीक ऑवर्स में पहले से जूझ रहे इलाकों में स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे आम नागरिकों की चिंता बढ़ गई है।

भारत की आईटी राजधानी बेंगलुरु एक बार फिर यातायात संकट को लेकर सुर्खियों में है। शहर के पूर्वी हिस्से में स्थित आईओसी जंक्शन फ्लाईओवर को ध्वस्त करने की तैयारी ने न केवल प्रशासनिक हलकों में बल्कि आम नागरिकों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। यह फ्लाईओवर वर्ष 2001-02 में रेलवे द्वारा निर्मित किया गया था और पिछले दो दशकों से इस क्षेत्र की यातायात व्यवस्था का अहम हिस्सा रहा है।

अब Bengaluru Smart Infrastructure Limited (बी-स्माइल) ने इस पुराने ढांचे को हटाकर 436 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक एलिवेटेड रोटरी फ्लाईओवर बनाने की योजना बनाई है। इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वी बेंगलुरु में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम को कम करना और सर एम विश्वेश्वरैया टर्मिनल तक बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करना है। हालांकि, इस योजना के लागू होने से पहले ही इसके प्रभावों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि फ्लाईओवर के विध्वंस के दौरान डोड्डा बनसवाड़ी रोड, ब्याप्पनहल्ली रोड और कम्मनहल्ली रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है। ये सभी सड़कें पहले से ही पीक आवर्स में अत्यधिक व्यस्त रहती हैं, और ऐसे में डायवर्जन से स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।


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परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जनता को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए एक व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके लिए विभिन्न नागरिक एजेंसियों और ट्रांसपोर्ट विभाग के बीच समन्वय किया जाएगा ताकि यातायात व्यवस्था को यथासंभव सुचारू रखा जा सके। इस परियोजना की एक और खास बात यह है कि इसके साथ-साथ ब्याप्पनहल्ली रोड को ओल्ड मद्रास रोड से जोड़ने के लिए एक नया रेलवे ओवरब्रिज भी प्रस्तावित है। इससे Sir M. Visvesvaraya Terminal तक पहुंच और अधिक आसान हो जाएगी, जो कि शहर के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है। बी-स्माइल के अधिकारियों के अनुसार, नया एलिवेटेड रोटरी फ्लाईओवर इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह विभिन्न दिशाओं से आने वाले ट्रैफिक को बिना रुकावट के टर्मिनल तक पहुंचा सके। इससे अंतिम-मील कनेक्टिविटी की पुरानी समस्या का समाधान होने की उम्मीद है, जो लंबे समय से यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। हालांकि, इस परियोजना की लागत में भारी वृद्धि ने भी सवाल खड़े किए हैं। वर्ष 2023 में इसकी अनुमानित लागत 263 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 436 करोड़ रुपये हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस वृद्धि का कारण डिजाइन में बदलाव, जीएसटी दरों में वृद्धि और मारुति सेवा नगर रोड से 1.5 किलोमीटर लंबे अतिरिक्त फ्लाईओवर का निर्माण है।

निर्माण कार्य को लेकर भी कई तकनीकी चुनौतियां सामने आ रही हैं। आईओसी जंक्शन के आसपास कई सक्रिय रेलवे लाइनें मौजूद हैं, जिससे निर्माण कार्य जटिल हो जाता है। हालांकि K-RIDE (के-राइड) ने इस परियोजना के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दे दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करना अभी भी चुनौतीपूर्ण रहेगा।

आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?

हालिया घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं:

8 क्या फ्लाईओवर तोड़ना ही ट्रैफिक का सही समाधान है?

  • क्या निर्माण के दौरान शहर पूरी तरह जाम की स्थिति में पहुंच जाएगा?

  • क्या 436 करोड़ की लागत वाजिब है?

  • क्या नागरिकों को वैकल्पिक मार्गों की पर्याप्त जानकारी मिलेगी?

  • क्या यह परियोजना वास्तव में ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान दे पाएगी?

Q1. IOC फ्लाईओवर क्यों तोड़ा जा रहा है?

Q2. परियोजना की कुल लागत कितनी है?

Q3. इससे किसे लाभ होगा?

Q4. निर्माण के दौरान क्या परेशानी होगी?

अब आपकी बारी!

इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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