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बेंगलुरु नगर निकाय चुनाव फिर टले: सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त तक बढ़ाई समय सीमा

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 20
  • 4 min read
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भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: नई दिल्ली/बेंगलुरु, 20 मई| बेंगलुरु नगर निकाय चुनाव को लेकर लंबे समय से जारी इंतजार एक बार फिर बढ़ गया है। Supreme Court of India ने बुधवार को Karnataka State Election Commission (एसईसी) को राहत देते हुए ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के अंतर्गत होने वाले नगर निगम चुनाव कराने की समय सीमा 30 जून से बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यह अंतिम विस्तार होगा और एसईसी को निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव कराकर रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इस फैसले के बाद बेंगलुरु में स्थानीय लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस फिर तेज हो गई है।

क्यों मांगा गया समय विस्तार?

एसईसी ने सर्वोच्च न्यायालय में अंतरिम याचिका दाखिल कर चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी। आयोग का कहना था कि जनगणना कार्य और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रियाएं एक साथ चल रही हैं, जिससे प्रशासनिक और लॉजिस्टिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन दोनों प्रक्रियाओं के कारण चुनाव संबंधी तैयारियां समय पर पूरी नहीं हो पा रही थीं। इसी आधार पर आयोग ने अदालत से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया।

पहले जून में प्रस्तावित थे चुनाव

इससे पहले राज्य चुनाव आयुक्त संगरेशी ने घोषणा की थी कि जीबीए के तहत आने वाले पांच नगर निगमों के चुनाव 14 जून से 24 जून के बीच कराए जाएंगे।

हालांकि, बाद में आयोग ने अदालत का रुख किया और कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में निर्धारित समय पर निष्पक्ष और व्यवस्थित चुनाव कराना संभव नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने एसईसी की दलीलों को सुनने के बाद चुनाव कराने की नई अंतिम तिथि 31 अगस्त तय की, साथ ही यह भी कहा कि आगे किसी और विस्तार की अनुमति नहीं दी जाएगी।

2020 से बिना निर्वाचित निकाय के बेंगलुरु

गौरतलब है कि Bruhat Bengaluru Mahanagara Palike (बीबीएमपी) का कार्यकाल सितंबर 2020 में समाप्त हो गया था। तब से बेंगलुरु में कोई निर्वाचित नगर निकाय नहीं है और प्रशासनिक व्यवस्था अधिकारियों के माध्यम से संचालित हो रही है।

बीते वर्षों में नगर प्रशासन के पुनर्गठन, वार्ड परिसीमन और कानूनी चुनौतियों के कारण चुनाव लगातार टलते रहे हैं।

अब शहर को नई Greater Bengaluru Authority (जीबीए) संरचना के तहत पांच नगर निगमों और 369 वार्डों में विभाजित किया गया है।

करीब 89 लाख मतदाता करेंगे मतदान

जीबीए के आंकड़ों के अनुसार, 369 वार्डों में कुल लगभग 88.95 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें लगभग 45.7 लाख पुरुष मतदाता, 43.2 लाख महिला मतदाता और 1,635 अन्य वर्ग के मतदाता शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े शहरी चुनाव के लिए मतदाता सूची का सटीक अद्यतन और प्रशासनिक तैयारी बेहद महत्वपूर्ण है।

राजनीतिक महत्व भी बढ़ा

बेंगलुरु नगर निकाय चुनाव केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें कर्नाटक की शहरी राजनीति का बड़ा संकेतक माना जा रहा है। आईटी राजधानी होने के कारण बेंगलुरु में बुनियादी ढांचे, ट्रैफिक, जल निकासी, कचरा प्रबंधन और शहरी विकास जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहने वाले हैं।

राजनीतिक दल भी इस चुनाव को आगामी राज्य और राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।

शहरवासियों में बढ़ी प्रतीक्षा

स्थानीय नागरिक संगठनों और शहरी विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक निर्वाचित नगर निकाय न होने से जवाबदेही और स्थानीय प्रतिनिधित्व प्रभावित हुआ है।

कई नागरिक समूहों ने समय पर चुनाव कराने की मांग उठाई थी। अब सुप्रीम कोर्ट की नई समयसीमा के बाद उम्मीद की जा रही है कि अगस्त तक चुनाव प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

आपके मन में उठ रहे सवाल (Q&A Section)

Q1. सुप्रीम कोर्ट ने नई समय सीमा क्या तय की है?

सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु नगर निकाय चुनाव कराने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तय की है।

Q2. चुनाव पहले कब प्रस्तावित थे?

एसईसी ने पहले 14 जून से 24 जून के बीच चुनाव कराने की घोषणा की थी।

Q3. चुनाव टालने का मुख्य कारण क्या बताया गया?

जनगणना कार्य और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कारण प्रशासनिक संसाधनों पर दबाव को मुख्य कारण बताया गया।

Q4. बेंगलुरु में निर्वाचित नगर निकाय कब से नहीं है?

सितंबर 2020 में बीबीएमपी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से शहर में निर्वाचित नगर निकाय नहीं है।

Q5. जीबीए संरचना में कितने वार्ड हैं?

ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के तहत कुल 369 वार्ड बनाए गए हैं।

निष्कर्ष: बेंगलुरु नगर निकाय चुनाव में देरी केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि शहर के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और शहरी शासन से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई अंतिम समयसीमा के बाद सभी की नजर चुनाव आयोग की तैयारियों और राजनीतिक दलों की रणनीति पर टिकी है। यदि अगस्त तक चुनाव संपन्न होते हैं, तो करीब छह वर्षों बाद बेंगलुरु को नया निर्वाचित शहरी नेतृत्व मिल सकता है।

Source: सुप्रीम कोर्ट आदेश, कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग दस्तावेज, प्रशासनिक रिपोर्ट्स और मीडिया इनपुट।

कीवर्ड्स: बेंगलुरु नगर निगम चुनाव, सुप्रीम कोर्ट बेंगलुरु चुनाव, ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी, BBMP चुनाव समाचार, कर्नाटक SEC अपडेट

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