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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

24अक्टूबर /2026 /शनिवार

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट शुरू करते हुए अपनी आगामी पुस्तक Belonging: A Journey of Love की पहली झलक साझा की। यह पुस्तक 10 नवंबर को जारी होने वाली है। अपनी पहली पोस्ट के माध्यम से सोनिया गांधी ने पाठकों को अपने निजी जीवन, पारिवारिक अनुभवों और राजनीतिक यात्रा से जुड़े उन प्रसंगों की जानकारी दी है, जिन्हें उन्होंने इस पुस्तक में शामिल किया है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट शुरू करते हुए अपनी आगामी पुस्तक Belonging: A Journey of Love की पहली झलक साझा की। यह पुस्तक 10 नवंबर को जारी होने वाली है। अपनी पहली पोस्ट के माध्यम से सोनिया गांधी ने पाठकों को अपने निजी जीवन, पारिवारिक अनुभवों और राजनीतिक यात्रा से जुड़े उन प्रसंगों की जानकारी दी है, जिन्हें उन्होंने इस पुस्तक में शामिल किया है।

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पारिजात के फूलों से महक उठते हैं गाँव के आँगन, प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम

लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
Ashok kumar Singh
2 घंटे पहले
2 मिनट पठन
पारिजात फूलों से सजा गांव, दाईं ओर प्रमोद कुमार सिंह का फोटो; प्रकृति-आस्था संदेश और भारतार्थ खबर

भारतार्थ खबर (Bhaarataarth.com) विशेष लेख | 24 अक्टूबर 2026 प्रेषक: प्रमोद कुमार सिंह, अयोध्या, उत्तर प्रदेश भारत की ग्रामीण संस्कृति में पारिजात यानी हरसिंगार के फूलों का विशेष स्थान है। शरद ऋतु में खिलने वाले सफेद पंखुड़ियों और नारंगी डंठल वाले ये फूल अपनी सुंदरता और मनमोहक सुगंध से घर-आँगन को महका देते हैं। विशेषकर अक्टूबर और नवंबर में पारिजात के फूलों की बहार देखने को मिलती है।


गाँवों में पारिजात का पेड़ अक्सर घर के आँगन, तुलसी चौरे के पास या दरवाजे के किनारे लगाया जाता है। शाम ढलने के बाद इसकी कलियाँ खिलने लगती हैं और रातभर वातावरण में सुगंध फैलाती हैं। सुबह होने से पहले इसके फूल स्वयं पेड़ से नीचे गिरने लगते हैं। जब लोग सुबह उठते हैं, तो पेड़ के नीचे बिखरे सफेद-नारंगी फूल प्राकृतिक रंगोली जैसा दृश्य प्रस्तुत करते हैं।


गाँवों में सुबह-सुबह महिलाएँ और बच्चे पूजा के लिए इन फूलों को चुनते दिखाई देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पारिजात का संबंध समुद्र मंथन से है और इसे देवताओं का प्रिय पुष्प माना जाता है। भगवान शिव, माता पार्वती और माता लक्ष्मी की पूजा में भी कई परिवार इन फूलों का उपयोग करते हैं।

लोकपरंपराओं में पारिजात की नारंगी डंडी से प्राप्त रंग का उपयोग माता की चुनरी रंगने और पूजा के चावल को रंगने में किए जाने का उल्लेख मिलता है। वहीं, शरद पूर्णिमा के अवसर पर पारिजात की सुंदरता और सुगंध को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष आस्था देखने को मिलती है।

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पारिजात केवल एक फूल नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण जीवन, प्रकृति और पारिवारिक परंपराओं का प्रतीक भी है। इसके पेड़ से जुड़ी यादें कई पीढ़ियों तक लोगों के मन में बसी रहती हैं। आज जब शहरी जीवन में प्रकृति से दूरी बढ़ रही है, तब पारिजात जैसे पौधे घरों में हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखने का संदेश देते हैं।


पारिजात का सबसे बड़ा संदेश उसके स्वभाव में छिपा है। यह फूल बिना तोड़े स्वयं धरती पर गिर जाता है, जहाँ लोग इसे प्रेम से चुनते हैं। इसी से जुड़ी एक सुंदर सीख है— “पारिजात बनना सीखिए, लोग तोड़ना नहीं, चुनना पसंद करेंगे।”


यह संदेश हमें सिखाता है कि जीवन में विनम्रता, अच्छे व्यवहार और दूसरों के प्रति समर्पण का महत्व बाहरी दिखावे से कहीं अधिक है।

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