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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

22अक्टूबर /2026 /गुरुवार

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

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नम आंखों से मां दुर्गा की विदाई, अगले वर्ष फिर पधारने की कामना के साथ संपन्न हुआ 48वां दशहरा महोत्सव

लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
Ashok kumar Singh
2 घंटे पहले
2 मिनट पठन
बंगालुरु में दशहरा विसर्जन का रंगीन पोस्टर, मां दुर्गा-गणेश की झांकी, झील में मूर्ति विसर्जन और लोगों की भीड़।

भारतार्थ खबर संवाददाता अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com)बेंगलुरु, 21 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित 48वां दशहरा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुआ। महोत्सव के समापन पर मां दुर्गा की विदाई का भावुक दृश्य देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां भगवती को विदाई दी और अगले वर्ष फिर से आगमन की कामना की।


महोत्सव के दौरान पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से भक्तों ने मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। उत्सव के समापन पर जहां आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न होने की प्रसन्नता थी, वहीं मां की विदाई के क्षण ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। भक्तों ने मां भगवती से परिवारों में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की।


भव्य शोभायात्रा के साथ निकली मां की विदाई यात्रा


मां दुर्गा की विदाई के लिए शोभायात्रा प्रिंसेस श्राइन, गेट नंबर-9, पैलेस ग्राउंड, बेल्लारी रोड स्थित पूजा पंडाल से निकाली गई। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आगे बढ़ती शोभायात्रा बेंगलुरु के अल्सूर लेक पहुंची, जहां निर्धारित विधि-विधान के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस अवसर पर मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमाओं का भी अल्सूर कल्याणी टैंक में विसर्जन किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ 48वें दशहरा महोत्सव का समापन हुआ। मां की विदाई के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से प्रार्थना की कि मां भगवती सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।

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समिति पदाधिकारियों ने जताया आभार


महोत्सव के सफल आयोजन के बाद सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष के. के. सिंह, पूजा अध्यक्ष अनिल तिवारी और सचिव सुबोध सिंह ने मां दुर्गा के भक्तों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। पदाधिकारियों ने आयोजन में तन-मन-धन से सहयोग देने वाले सभी सदस्यों, भक्तों और सहयोगियों का धन्यवाद किया। उन्होंने मां भगवती से सभी श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण करने तथा उनके जीवन में सुख, शांति और मंगल बनाए रखने की प्रार्थना की। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि धार्मिक आयोजनों की सफलता में सामूहिक सहभागिता, श्रद्धा और समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सभी के सहयोग से महोत्सव संपन्न हुआ और श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त करने का अवसर मिला।


विदाई के साथ अगले वर्ष के आगमन की प्रतीक्षा


दशहरा महोत्सव के समापन और प्रतिमा विसर्जन के साथ पूजा पंडाल में सजे उत्सव का समापन हो गया, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में मां दुर्गा के प्रति भक्ति और विश्वास का भाव बना रहा। विदाई के समय भक्तों की आंखें नम थीं और हृदय में अगले वर्ष मां के पुनः आगमन की प्रतीक्षा थी। मां दुर्गा की विदाई भारतीय धार्मिक परंपराओं में आस्था, भावनाओं और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक है। यह अवसर भक्तों को सत्य, सद्भाव, सेवा और सकारात्मकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। 48वें दशहरा महोत्सव का समापन इसी भाव के साथ हुआ कि मां भगवती सभी परिवारों पर अपनी कृपा बनाए रखें, समाज में सुख-शांति और सद्भाव कायम रहे तथा अगले वर्ष फिर भक्तों को मां की आराधना का सौभाग्य प्राप्त हो। समाचार प्रेषक श्रीकान्त शर्मा 'शब्द', बेंगलुरु।


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