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दोषी जनप्रतिनिधियों पर सख्ती: फड़नवीस सरकार का बड़ा प्रोटोकॉल बदलाव

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 29
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

मुंबई। महाराष्ट्र में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। देवेंद्र फड़नवीस सरकार के इस नए फैसले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक हलचल मचा दी है। अब सरकारी अधिकारी उन विधायक (MLA) और सांसद (MP) के सम्मान में खड़े नहीं होंगे, जो अपराध में दोषी पाए गए हैं या किसी जांच के सिलसिले में सरकारी दफ्तर पहुंचे हैं। इस फैसले को “निष्पक्ष प्रशासन” की दिशा में एक सख्त और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं—क्या यह बदलाव राजनीति में जवाबदेही की नई शुरुआत है?

क्या है नया नियम?

महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी ताजा शासन निर्णय (GR) के अनुसार, यदि कोई जनप्रतिनिधि:

  • किसी अपराध में दोषी करार दिया गया हो

  • किसी अदालती या विभागीय जांच में शामिल हो

  • चुनावी प्रक्रिया (नामांकन, सुनवाई आदि) के लिए सरकारी दफ्तर आया हो

तो ऐसे मामलों में अधिकारियों को उनके लिए खड़े होने या विशेष प्रोटोकॉल निभाने की जरूरत नहीं होगी।

आम नागरिक जैसा व्यवहार अनिवार्य

मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन परिस्थितियों में जनप्रतिनिधियों के साथ बिल्कुल सामान्य नागरिक जैसा व्यवहार किया जाए। इसका उद्देश्य प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखना है, ताकि किसी भी तरह का “प्रभाव” या “दबाव” न बने।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि जांच या सुनवाई के दौरान किसी जनप्रतिनिधि के लिए खड़े होना या अत्यधिक सम्मान दिखाना न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

इसलिए यह कदम पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष शासन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

पुराने नियम से कितना अलग?

20 नवंबर 2025 को जारी पुराने निर्देशों के तहत अधिकारियों के लिए यह अनिवार्य था कि वे किसी भी विधायक या सांसद के आने-जाने पर खड़े होकर सम्मान प्रकट करें। लेकिन अब इस नियम में बड़ा बदलाव करते हुए इसे सीमित कर दिया गया है—यानि अब “सम्मान” का आधार पद नहीं, बल्कि स्थिति और कानून होगा।

क्या यह बदलाव राजनीति में नई संस्कृति लाएगा?

यह फैसला कई बड़े सवाल खड़े करता है:

  • क्या इससे राजनीति में जवाबदेही बढ़ेगी?

  • क्या दोषी नेताओं पर सामाजिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ेगा?

  • क्या अन्य राज्यों में भी ऐसे नियम लागू होंगे?

  • क्या यह VIP कल्चर खत्म करने की शुरुआत है?

Q1. क्या सभी MLA-MP के लिए यह नियम लागू होगा?

Q2. क्या अधिकारी पूरी तरह सम्मान देना बंद कर देंगे?

Q3. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य क्या है?

Q4. क्या यह नियम पूरे भारत में लागू होगा?

अब आपकी बारी!

आप इस फैसले को कैसे देखते हैं? क्या यह सही दिशा में कदम है या इससे राजनीतिक टकराव बढ़ेगा?

नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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