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दिल्ली शराब नीति केस में बड़ा मोड़: जस्टिस स्वर्ण कांता अलग हुईं, केजरीवाल समेत AAP नेताओं पर अवमानना कार्रवाई

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 15
  • 4 min read
“दिल्ली हाईकोर्ट में शराब नीति मामले की सुनवाई के दौरान मौजूद न्यायिक अधिकारी और संबंधित पक्ष”
“दिल्ली हाईकोर्ट में शराब नीति मामले की सुनवाई के दौरान मौजूद न्यायिक अधिकारी और संबंधित पक्ष”

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: नई दिल्ली, 14 मई। नई दिल्ली में चर्चित दिल्ली आबकारी नीति (Excise Policy) मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार को बड़ा न्यायिक घटनाक्रम सामने आया। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने शराब नीति से जुड़े मुख्य मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, लेकिन आम आदमी पार्टी (AAP) नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की सुनवाई वे स्वयं करेंगी।

दिल्ली हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने न्यायपालिका पर की गई टिप्पणियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया और जजों पर व्यक्तिगत टिप्पणियां “फेयर क्रिटिसिज्म” की सीमा से बाहर हैं।

इस मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और दुर्गेश पाठक के खिलाफ आपराधिक मानहानि और अवमानना कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया गया है।

अदालत की सख्त टिप्पणी ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मेरे चुप रहने का मतलब होगा कि मैं उनके डराने से डर गई, जो मैं नहीं करूंगी।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि अदालत को यह संदेश दिया जाए कि “यदि फैसला हमारे पक्ष में नहीं आया तो हम अदालत को बदनाम करेंगे”, तो न्यायपालिका ऐसे दबाव या धमकियों से नहीं डरेगी।

कोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था हमेशा निडर रही है और आगे भी ऐसी टिप्पणियों के सामने झुकेगी नहीं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश किसी व्यक्तिगत दुर्भावना या गुस्से में नहीं दिया गया, बल्कि संबंधित नेताओं की टिप्पणियों और आचरण के आधार पर जारी किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला दिल्ली शराब नीति केस से जुड़ी सीबीआई की अपील और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिकाओं से जुड़ा हुआ है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी नोट किया कि कुछ प्रतिवादियों की ओर से निर्धारित समय पर जवाब दाखिल नहीं किया गया। इनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक के नाम शामिल बताए गए।

कोर्ट ने इस देरी और न्यायपालिका के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए अवमानना कार्यवाही शुरू करने का फैसला लिया।

सौरभ भारद्वाज की टिप्पणी पर अदालत नाराज

सुनवाई के दौरान अदालत ने AAP नेता सौरभ भारद्वाज की सोशल मीडिया पोस्ट का भी उल्लेख किया।

जस्टिस शर्मा ने कहा कि “सौरभ भारद्वाज ने पोस्ट कर पूछा कि ‘जस्टिस स्वर्ण कांता का यह रिश्ता क्या कहलाता है’, तो उसका जवाब है कि इसे कंटेंप्ट (अवमानना) कहा जाता है।”

अदालत ने इस टिप्पणी को न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला माना और कहा कि ऐसी टिप्पणियां न्यायिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।

न्यायपालिका बनाम राजनीतिक बयानबाजी?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला केवल शराब नीति केस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब न्यायपालिका और राजनीतिक बयानबाजी के बीच मर्यादा की बहस का विषय भी बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह रुख भविष्य में राजनीतिक दलों और नेताओं द्वारा न्यायपालिका पर सार्वजनिक टिप्पणियों के मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

Fact Box

दिल्ली हाईकोर्ट में शराब नीति मामले की सुनवाई

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा मुख्य केस से अलग हुईं

अवमानना कार्यवाही की सुनवाई खुद करेंगी

अरविंद केजरीवाल समेत चार नेताओं पर कार्रवाई

न्यायपालिका पर टिप्पणियों को अदालत ने गंभीर माना

CBI और ED की याचिकाओं से जुड़ा मामला

Q&A : आपके मन में उठ रहे सवाल

Q1. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने क्या फैसला लिया?

उन्होंने दिल्ली शराब नीति केस की मुख्य सुनवाई से खुद को अलग किया, लेकिन अवमानना मामले की सुनवाई जारी रखेंगी।

Q2. किन नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू हुई?

अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और दुर्गेश पाठक के खिलाफ अदालत ने कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है।

Q3. अदालत ने किस बात पर नाराजगी जताई?

न्यायपालिका और जजों के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणियों तथा जवाब दाखिल करने में देरी पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।

Q4. क्या यह मामला केवल शराब नीति तक सीमित है?

नहीं। अब यह मामला न्यायपालिका की गरिमा और राजनीतिक बयानबाजी की सीमाओं पर भी केंद्रित हो गया है।

Q5. अवमानना कार्यवाही का क्या मतलब होता है?

जब अदालत की गरिमा, आदेश या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली गतिविधि सामने आती है, तो अदालत अवमानना कार्रवाई शुरू कर सकती है।

Keywords: दिल्ली शराब नीति केस, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा, अरविंद केजरीवाल, AAP Contempt Case, दिल्ली हाईकोर्ट

Description: दिल्ली हाईकोर्ट में शराब नीति मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को केस से अलग किया। अरविंद केजरीवाल समेत AAP नेताओं पर अवमानना कार्रवाई शुरू।

निष्कर्ष: दिल्ली शराब नीति मामला अब केवल कथित घोटाले की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। न्यायपालिका पर सार्वजनिक टिप्पणियों और अदालत की गरिमा को लेकर उठे सवालों ने इस पूरे घटनाक्रम को संवैधानिक और राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से, बल्कि राजनीतिक संवाद की मर्यादाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

Source: दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाही, अदालत में हुई टिप्पणियां और संबंधित कानूनी दस्तावेजों से प्राप्त जानकारी।

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