जय भीम योजना घोटाला: 9 संचालक गिरफ्तार, 37 करोड़ की गड़बड़ी उजागर
- धन्ना राम चौधरी

- 2 मई
- 3 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com}
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला बड़ा घोटाला सामने आया है। दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ में करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की कार्रवाई में 9 कोचिंग संस्थानों से जुड़े मालिक, डायरेक्टर और अन्य संबंधित लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला न सिर्फ सरकारी फंड के दुरुपयोग का है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का भी है। 30 अप्रैल को सभी आरोपियों को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस कार्रवाई के बाद पूरे शिक्षा तंत्र में हड़कंप मच गया है और कई बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
क्या है ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’?
यह योजना वर्ष 2018-19 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग उपलब्ध कराना था। बाद में 2019-20 में इसका दायरा बढ़ाकर अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को भी शामिल किया गया। सरकार का मकसद था कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली छात्र भी UPSC, SSC, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकें।
कैसे हुआ करोड़ों का फर्जीवाड़ा?
ACB की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं—
डुप्लीकेट एडमिशन घोटाला: एक ही छात्र का नाम कई कोचिंग संस्थानों में दिखाकर सरकारी फंड लिया गया।
फर्जी रिकॉर्ड: कई छात्रों ने बयान दिया कि उन्होंने संबंधित संस्थान में कभी प्रवेश लिया ही नहीं।
स्टाइपेंड में हेराफेरी: छात्रों को मिलने वाली आर्थिक सहायता (स्टाइपेंड) भी कई मामलों में नहीं दी गई।
नियमों की अनदेखी: योजना के तहत अलग बैंक अकाउंट रखना अनिवार्य था, लेकिन कई संस्थानों ने इसका पालन नहीं किया। आउटसोर्सिंग का खेल: कुछ कोचिंग संस्थानों ने खुद पढ़ाने के बजाय छात्रों को स्थानीय ट्यूशन सेंटर भेज दिया। इन सभी तरीकों से सरकारी सिस्टम को गुमराह कर बड़े पैमाने पर फंड निकाला गया।
37 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का खुलासा
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन कोचिंग संस्थानों ने योजना के तहत करीब 37.20 करोड़ रुपये प्राप्त किए, जिसमें भारी अनियमितताओं की आशंका है। यह भी सामने आया है कि संबंधित विभाग के कुछ अधिकारियों ने निगरानी में लापरवाही बरती, जिससे यह घोटाला लंबे समय तक चलता रहा।
जांच जारी, और गिरफ्तारी संभव
फिलहाल 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन जांच अभी जारी है। ACB अन्य कोचिंग संस्थानों और संबंधित सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। साथ ही छात्रों के आय और जाति प्रमाण पत्रों की भी गहन जांच की जा रही है, ताकि फर्जी लाभार्थियों की पहचान की जा सके। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
आपके मन में उठ रहे सवाल
क्या सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग सिस्टम इतना कमजोर है कि करोड़ों का घोटाला हो जाए?
क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
गरीब छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
क्या भविष्य में ऐसी योजनाओं के लिए डिजिटल ट्रैकिंग अनिवार्य होनी चाहिए?
Q1. कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
Q2. यह घोटाला किस योजना से जुड़ा है?
Q3. कितनी राशि की गड़बड़ी सामने आई है?
Q4. मुख्य आरोप क्या हैं?
Q5. क्या जांच पूरी हो गई है?
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