top of page

“भारतार्थ खबर – खबर नहीं, उसका अर्थ”“हर खबर का सही विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“सच्ची खबर, सही अर्थ – भारतार्थ खबर”“जहाँ खबरों का होता है असली विश्लेषण”“ताज़ा खबरें, सटीक विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“हर खबर की गहराई तक – भारतार्थ खबर”“Breaking News से लेकर विशेष रिपोर्ट तक”“देश-दुनिया की हर बड़ी खबर – भारतार्थ खबर”

नोएडा एयरपोर्ट का उद्घाटन: क्या “हर दो मिनट में उड़ान” भारत के विकास मॉडल की नई पहचान है?

गंगा जल संधि पर बढ़ा तनाव: बांग्लादेश ने दिया संकेत, क्या 2026 के बाद बदल जाएंगे भारत-बांग्लादेश रिश्ते?

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • May 17
  • 4 min read
“फरक्का बैराज और गंगा-पद्मा नदी जल बंटवारे को लेकर भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ती कूटनीतिक चर्चा”
“फरक्का बैराज और गंगा-पद्मा नदी जल बंटवारे को लेकर भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ती कूटनीतिक चर्चा”

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन: नई दिल्ली/ढाका, 17 मई। भारत और बांग्लादेश के बीच 30 साल पुरानी गंगा जल संधि अब एक बार फिर कूटनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। दिसंबर 2026 में समाप्त होने जा रही इस ऐतिहासिक संधि के नवीनीकरण को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव के संकेत दिखाई देने लगे हैं। बांग्लादेश ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ उसके भविष्य के संबंध काफी हद तक नई गंगा जल संधि पर निर्भर करेंगे।

इसी बीच बांग्लादेश सरकार द्वारा पद्मा नदी पर मेगा बैराज परियोजना को मंजूरी दिए जाने के बाद इस मुद्दे ने और राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया है। गंगा नदी को बांग्लादेश में पद्मा कहा जाता है।

BNP का भारत को सीधा संदेश

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि नई गंगा जल संधि पर जल्द बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने बयान में कहा कि बांग्लादेश की जनता की अपेक्षाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई संधि लागू करना जरूरी है और भारत के साथ अच्छे संबंध भी इसी पर निर्भर करेंगे।

यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश सरकार ने पद्मा नदी पर एक बड़े बैराज प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। ढाका का दावा है कि यह परियोजना भारत के फरक्का बैराज के प्रभावों को संतुलित करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।

क्या है गंगा जल संधि?

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल साझाकरण संधि पर दिसंबर 1996 में नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते पर तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा और तत्कालीन बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हस्ताक्षर किए थे।

यह संधि 30 वर्षों के लिए लागू की गई थी और इसका उद्देश्य फरक्का बैराज पर गंगा के पानी का दोनों देशों के बीच न्यायसंगत बंटवारा सुनिश्चित करना था। यह समझौता दिसंबर 2026 में समाप्त हो जाएगा।

कैसे होता है पानी का बंटवारा?

गंगा जल संधि मुख्य रूप से सूखे मौसम में फरक्का बैराज से पानी के वितरण को नियंत्रित करती है। संधि के अनुसार:

यदि पानी का प्रवाह 70,000 क्यूसेक या उससे कम हो, तो भारत और बांग्लादेश को 50-50 प्रतिशत पानी मिलता है।

यदि प्रवाह 70,000 से 75,000 क्यूसेक के बीच हो, तो बांग्लादेश को 35,000 क्यूसेक पानी सुनिश्चित किया जाता है।

यदि प्रवाह 75,000 क्यूसेक से अधिक हो, तो भारत 40,000 क्यूसेक पानी अपने पास रखता है और बाकी पानी बांग्लादेश को दिया जाता है।

विवाद की मुख्य वजह क्या है?

बांग्लादेश लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि सूखे मौसम में भारत फरक्का बैराज से तय सीमा से अधिक पानी मोड़ता है, जिससे उसके कई हिस्सों में जल संकट और खारे पानी की घुसपैठ बढ़ती है। खासकर दक्षिण-पश्चिमी तटीय इलाकों में कृषि और पेयजल पर इसका असर पड़ने की बात कही जाती रही है।

दूसरी ओर भारत का कहना है कि फरक्का बैराज का निर्माण हुगली नदी में जल प्रवाह बनाए रखने और कोलकाता पोर्ट को बचाने के उद्देश्य से किया गया था। भारत लगातार यह भी कहता रहा है कि जल बंटवारा संधि के नियमों के अनुसार ही किया जाता है।

पद्मा बैराज परियोजना क्यों अहम?

बांग्लादेश द्वारा प्रस्तावित पद्मा बैराज परियोजना को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना आगे बढ़ती है, तो क्षेत्रीय जल प्रबंधन और दोनों देशों के संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।

हालांकि, परियोजना को लेकर वित्तीय, तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियों की भी चर्चा हो रही है। अभी तक इस परियोजना के पूर्ण प्रभावों का आधिकारिक आकलन सार्वजनिक नहीं किया गया है।

आपके मन में उठ रहे सवाल (Q&A)

Q1. गंगा जल संधि कब हुई थी?

भारत और बांग्लादेश के बीच यह संधि दिसंबर 1996 में हुई थी।

Q2. संधि कब समाप्त होगी?

30 वर्षीय यह समझौता दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाला है।

Q3. फरक्का बैराज विवाद क्यों है?

बांग्लादेश का आरोप है कि फरक्का बैराज के कारण सूखे मौसम में उसके हिस्से का पानी कम हो जाता है।

Q4. पद्मा बैराज क्या है?

बांग्लादेश की प्रस्तावित मेगा परियोजना, जिसका उद्देश्य पद्मा नदी के जल प्रबंधन को मजबूत करना है।

Q5. क्या इससे भारत-बांग्लादेश संबंध प्रभावित हो सकते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार जल बंटवारा दोनों देशों के संबंधों में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए संधि का नवीनीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निष्कर्ष: गंगा जल संधि केवल पानी के बंटवारे का समझौता नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय कूटनीति और पड़ोसी संबंधों का महत्वपूर्ण आधार भी है। जैसे-जैसे 2026 की समयसीमा करीब आ रही है, दोनों देशों के लिए संतुलित और व्यावहारिक समाधान तलाशना चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले महीनों में होने वाली वार्ताएं तय करेंगी कि भारत और बांग्लादेश अपने संबंधों को सहयोग की दिशा में आगे बढ़ाते हैं या जल विवाद नई कूटनीतिक जटिलताएं पैदा करता है।

Source: भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि दस्तावेज, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के बयान, कूटनीतिक एवं सरकारी सूत्र।

Keywords: गंगा जल संधि, भारत बांग्लादेश जल विवाद, फरक्का बैराज, पद्मा बैराज परियोजना,

अब आपकी बारी! इन सभी सवालों पर अपनी राय और जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

राष्ट्र निर्माण में बनें भागीदार।

सही, सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए Bhaarataarth Khabar से जुड़े रहें और दूसरों को भी जोड़ें।

Support करें – Like | Share | Follow ताकि हर जरूरी खबर आप तक सबसे पहले पहुंचे।

ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें “Bhaarataarth Khabar” के साथ।


Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page