top of page

 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

06 नवंबर /2026 /शुक्रवार

रांची, 5 नवंबर 2026। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री एवं कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए दावा किया है कि देश के 40 लाख युवा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संकेत का इंतजार कर रहे हैं और उनके आह्वान पर सड़क पर उतरने के लिए तैयार हैं। अंसारी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने युवाओं, किसानों, दलितों, छात्रों और मध्यवर्ग की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो देश में गंभीर राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

रांची, 5 नवंबर 2026। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री एवं कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए दावा किया है कि देश के 40 लाख युवा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संकेत का इंतजार कर रहे हैं और उनके आह्वान पर सड़क पर उतरने के लिए तैयार हैं। अंसारी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने युवाओं, किसानों, दलितों, छात्रों और मध्यवर्ग की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो देश में गंभीर राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

WhatsApp Video 2026-10-04 at 8.50.36 PM.mp4

उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार से नेशनल कॉन्फ्रेंस में घमासान, 11 विधायक नाराज; कफन पहनकर प्रदर्शन

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
29 अक्टू॰
3 मिनट पठन
जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस में असंतोष बढ़ा।

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com श्रीनगर, 29 अक्टूबर 2026। जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। मंत्री पद की दौड़ में पिछड़े कई विधायकों और उनके समर्थकों ने पार्टी नेतृत्व के फैसले पर नाराजगी जताई है। कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जबकि कुछ नेताओं ने पार्टी छोड़ने या अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल के समर्थकों के कफन पहनकर प्रदर्शन करने से विवाद ने और गंभीर रूप ले लिया है।


पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को शांत करने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय होना पड़ा है। हालांकि, नाराज नेताओं को मनाने की कोशिशों के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व और पार्टी के आंतरिक तालमेल के लिए चुनौती बन सकता है।


चार नए मंत्री शामिल, कई दावेदार रह गए बाहर


उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को परिवहन मंत्री सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटाकर चार नए मंत्रियों को शामिल किया। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत 90 सदस्यीय विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेश में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की अधिकतम संख्या 9 हो सकती है। मंत्रिमंडल विस्तार में सीमित पदों के कारण कई विधायकों की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं। खबरों के मुताबिक, मंत्री पद से वंचित 11 विधायक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए, जबकि कुछ नेताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की। असंतोष का एक प्रमुख कारण मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलना है, लेकिन कुछ वरिष्ठ नेताओं ने फैसले लेने की प्रक्रिया में अपनी अनदेखी का भी आरोप लगाया है।


मुबारक गुल के समर्थकों का कफन पहनकर प्रदर्शन


पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल को मनाने के लिए डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें संगठन में महासचिव की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, गुल के मुताबिक उनके समर्थक इससे संतुष्ट नहीं हैं और उनसे इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं। मंगलवार से शुरू हुआ विरोध बुधवार को भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने सफेद कफन पहनकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी की और फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। गुल ने चार नवंबर को अपना अगला रुख स्पष्ट करने की बात कही है। प्रदर्शन के दौरान आत्मदाह की धमकी दिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि ऐसी धमकियों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पूर्व मंत्री नजीर अहमद गुरेजी को भी फारूक अब्दुल्ला ने फोन कर मनाने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर इसका सकारात्मक नतीजा नहीं निकला। गुरेजी ने भी अलग रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है। वहीं, अब्दुल मजीद लारमी ने अपनी वरिष्ठता की अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र में लोगों का सामना करना मुश्किल हो गया है। पुंछ के विधायक एजाज जान और अर्जुन सिंह राजू भी फैसले से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। एजाज जान ने पहाड़ी समुदाय की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके परिवार ने पार्टी के लिए लंबे समय तक काम किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला।


फैसले लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल


नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक विधायक ने आरोप लगाया कि पार्टी में महत्वपूर्ण फैसले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके कुछ करीबी नेताओं तक सीमित हो गए हैं। उनके अनुसार, इससे वरिष्ठ नेताओं और विधायकों में उपेक्षा की भावना बढ़ रही है। पार्टी छोड़ चुके पूर्व विधायक सैयद मोहम्मद अखून ने भी आंतरिक लोकतंत्र और वफादार नेताओं को पर्याप्त महत्व नहीं मिलने का दावा किया है। उनके मुताबिक, नेतृत्व को पहले ही संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष के बारे में आगाह किया गया था, लेकिन शिकायतों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। ये आरोप संबंधित नेताओं के बयान हैं; पार्टी नेतृत्व का पक्ष सामने आने पर पूरे घटनाक्रम का आकलन अधिक स्पष्ट हो सकेगा।


नेतृत्व की मनाने की कोशिश, लेकिन चुनौती बरकरार


पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट विधायकों को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहा है। डॉ. फारूक अब्दुल्ला और वरिष्ठ नेता अब्दुल रहीम राथर कई विधायकों से संपर्क कर चुके हैं। इसके बावजूद विरोध के तत्काल समाप्त होने के संकेत नहीं मिले हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से बताया गया है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कुछ असंतोष की आशंका थी, लेकिन विरोध इतना व्यापक होगा, इसका अनुमान नहीं था।


क्या आंतरिक कलह सरकार के लिए बनेगी चुनौती?


राजनीतिक विश्लेषक बिलाल बशीर के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सामने आया विरोध नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर संगठनात्मक चुनौतियों को उजागर करता है। पार्टी सांसद आगा रुहुल्ला की ओर से पहले से उठ रहे असहमति के स्वर भी नेतृत्व के लिए चुनौती माने जा रहे हैं। यदि असंतुष्ट विधायक भी खुलकर विरोध जारी रखते हैं, तो इसका असर पार्टी की एकजुटता और सरकार के कामकाज पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि असंतोष किसी बड़े राजनीतिक टूट की ओर बढ़ेगा। आने वाले दिनों में नेतृत्व की बातचीत, असंतुष्ट विधायकों की प्रतिक्रिया और पार्टी के संगठनात्मक फैसले तय करेंगे कि यह विवाद कितना गहराता है।



टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page