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TMC-Congress Merger: ममता लौटीं, अभिषेक दिल्ली में डटे

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Jun 11
  • 3 min read

सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकातों के बाद बंगाल की राजनीति में तेज हुई सियासी हलचल, TMC-कांग्रेस विलय की चर्चाओं ने पकड़ा जोर


दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद ममता और अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक गतिविधियों ने बढ़ाई हलचल।
दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद ममता और अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक गतिविधियों ने बढ़ाई हलचल।

भारतार्थ खबर | संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता/नई दिल्ली | 11 जून 2026| पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। TMC-Congress Merger को लेकर चर्चाएं अचानक तेज हो गई हैं। दिल्ली में लगातार दो दिनों तक हाईप्रोफाइल बैठकों के बाद ममता बनर्जी अकेले कोलकाता लौट आईं, जबकि उनके भतीजे और तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी अभी भी दिल्ली में डटे हुए हैं। इसी घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों और संभावित गठबंधन की अटकलों को और हवा दे दी है।

मंगलवार को ममता बनर्जी की कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात हुई थी। इसके अगले दिन अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से अलग से बैठक की। इन बैठकों के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसे सिर्फ सामान्य राजनीतिक मुलाकात नहीं मान रहे, बल्कि बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में संभावित बड़े बदलाव की आहट के रूप में देख रहे हैं।

दिल्ली से लौटने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों ने जब ममता बनर्जी से कांग्रेस में संभावित विलय को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बिना कुछ बोले सीधे कार में बैठकर रवाना हो जाने से सियासी चर्चाएं और तेज हो गईं।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने वर्ष 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। उस समय उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर पश्चिम Bengal में वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ प्रभावी आंदोलन न चलाने का आरोप लगाया था। अब लगभग तीन दशक बाद फिर से TMC और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

हालांकि, पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने विलय की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि उनका गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है और पार्टी के कांग्रेस में विलय का कोई सवाल नहीं उठता। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने साफ संकेत दिए कि कांग्रेस में वापसी चाहने वालों को राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करना होगा।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आगामी चुनावों और विपक्षी राजनीति की नई रणनीति को देखते हुए TMC और कांग्रेस के बीच रिश्तों में नजदीकी बढ़ सकती है। हालांकि अभी तक किसी भी दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दिल्ली में हुई बैठकों ने राष्ट्रीय राजनीति का तापमान जरूर बढ़ा दिया है।

Fact Box

  • ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस छोड़कर TMC बनाई थी

  • दिल्ली में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से अलग-अलग मुलाकातें हुईं

  • अभिषेक बनर्जी अभी भी दिल्ली में मौजूद

  • TMC-Congress Merger को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज

  • कांग्रेस नेताओं ने विलय पर सशर्त प्रतिक्रिया दी

FAQ Section

Q1. क्या TMC का कांग्रेस में विलय होने जा रहा है?

फिलहाल किसी भी पार्टी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन हालिया बैठकों के बाद चर्चाएं तेज हैं।

Q2. अभिषेक बनर्जी दिल्ली में क्यों रुके हुए हैं?

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चाएं बढ़ गई हैं।

Q3. ममता बनर्जी ने TMC कब बनाई थी?

उन्होंने 1 जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी।

Q4. कांग्रेस ने विलय को लेकर क्या कहा?

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वापसी करने वालों को राहुल गांधी का नेतृत्व स्वीकार करना होगा।

निष्कर्ष: दिल्ली में हुई हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मुलाकातों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ममता बनर्जी की चुप्पी और अभिषेक बनर्जी की दिल्ली में मौजूदगी ने TMC-Congress Merger की अटकलों को और मजबूत कर दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह सिर्फ राजनीतिक रणनीति है या भारतीय राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।

News Source: राजनीतिक सूत्र, दिल्ली एवं कोलकाता मीडिया रिपोर्ट्स

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  • क्या TMC और कांग्रेस का संभावित गठबंधन बंगाल की राजनीति बदल देगा?

  • क्या विपक्षी एकता को इससे नई ताकत मिलेगी?

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