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NIA केस में इंजीनियर राशिद की राहत याचिका, बीमार पिता से मिलने की मांग ने बढ़ाई सियासी हलचल

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 26
  • 3 min read
 NIA केस में फंसे इंजीनियर राशिद ने बीमार पिता से मिलने की मांगी अनुमति   engineer-rashid-court-case.jpg
 NIA केस में फंसे इंजीनियर राशिद ने बीमार पिता से मिलने की मांगी अनुमति  engineer-rashid-court-case.jpg

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है, जब बारामूला से सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ इंजीनियर राशिद ने अपने बीमार पिता से मिलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में राहत याचिका दाखिल की है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा आतंक फंडिंग केस में गिरफ्तार राशिद फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनकी अंतरिम जमानत याचिका पहले खारिज हो चुकी है, जिसके बाद अब यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टि से चर्चा में है।

मानवीय आधार बनाम सुरक्षा चिंता: अदालत में टकराव

इंजीनियर राशिद ने अदालत से अपील की है कि उन्हें मानवीय आधार पर अपने अस्पताल में भर्ती पिता से मिलने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि यह एक पारिवारिक और संवेदनशील स्थिति है, जिसमें अदालत को सहानुभूति दिखानी चाहिए। हालांकि, राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इस मांग का कड़ा विरोध किया है। एजेंसी का तर्क है कि राशिद पर लगे आरोप गंभीर हैं और उन्हें अंतरिम जमानत देना सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।

कस्टडी पैरोल: बीच का रास्ता?

NIA ने अदालत के सामने एक विकल्प रखा है—कस्टडी पैरोल। इसके तहत राशिद को जेल प्रशासन की निगरानी में परिवार से मिलने की अनुमति दी जा सकती है।

यह प्रस्ताव अदालत के लिए एक संतुलित रास्ता माना जा रहा है, जिसमें मानवीय पहलू और सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि, राशिद के वकील का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह से पर्याप्त नहीं है और उन्हें अंतरिम जमानत मिलनी चाहिए।

पहले भी मिल चुकी है राहत

यह पहला मौका नहीं है जब राशिद को अदालत से राहत मिली हो। जनवरी में उन्हें संसद के बजट सत्र में शामिल होने के लिए कस्टडी पैरोल दी गई थी। उस दौरान वे पुलिस सुरक्षा में लोकसभा पहुंचे थे। इस फैसले ने यह सवाल भी खड़ा किया था कि क्या एक सांसद के रूप में उनके अधिकारों और सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन संभव है?

खर्च पर विवाद ने बढ़ाई कानूनी जटिलता

इंजीनियर राशिद ने पहले अदालत में यह भी अपील की थी कि उनकी संसद यात्रा पर हुए लगभग 4 लाख रुपये के सुरक्षा खर्च को कम किया जाए। इस मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ में मतभेद सामने आया।

  • जस्टिस विवेक चौधरी ने राहत देने से इनकार किया

  • जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने राहत के पक्ष में राय दी

इस असहमति के बाद मामला मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला कानूनी रूप से कितना जटिल हो चुका है।

वकील vs पुलिस: तर्कों की जंग

राशिद के वकील का कहना है कि भारी सुरक्षा खर्च एक सांसद के संवैधानिक कर्तव्यों में बाधा डालता है। वहीं, दिल्ली पुलिस का पक्ष है कि यह खर्च आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक असर और जनचर्चा

इस पूरे घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक ओर जहां समर्थक इसे मानवाधिकार का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मान रहे हैं।

Q1. इंजीनियर राशिद कौन हैं?

Q2. उन्हें किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?

Q3. कस्टडी पैरोल क्या होती है?

Q4. क्या उन्हें पहले भी राहत मिली है?

Q5. इस केस का राजनीतिक असर क्या है?

आपके मन में उठ रहे सवाल क्या हैं?

हाल ही में हुए घटनाक्रम ने राजनीति में हलचल मचा दी है, और हर नागरिक के मन में कई अहम सवाल उठ रहे हैं—

अब आपकी बारी!

इन सवालों पर अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। आपकी सोच ही लोकतंत्र की ताकत है।

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