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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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मृत्यभोज कुरीति पर बड़ा संदेश: गुरुवाणी को अपनाने की अपील

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
10 जून
3 मिनट पठन

कलबी समाज में मृत्यभोज त्यागने और गुरुवाणी के मार्ग पर चलने का आह्वान, संतों ने बताया सामाजिक अभिशाप



भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

डेटलाइन | शिकारपुरा/राजस्थान | 10 जून, 2026| कलबी समाज में वर्षों से चली आ रही मृत्यभोज जैसी रूढ़िवादी कुरीतियों को लेकर अब जागरूकता की नई लहर दिखाई दे रही है। “मृत्यभोज कुरीति” को समाज और धर्म दोनों के लिए हानिकारक बताते हुए समाज के जागरूक वर्ग ने गुरुवाणी के अनुरूप जीवन जीने की अपील की है। समाज के संतों, विद्वानों और जागृत युवाओं द्वारा यह संदेश दिया जा रहा है कि मृत्यभोज जैसी परंपराएं आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से परिवारों पर भारी बोझ डालती हैं।

गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज के उपदेशों (गुरुवाणी) में मृत्यभोज को त्याज्य और अभक्ष्य बताया गया है। वहीं राजकीय स्तर पर भी इसे दंडनीय और घृणित कुरीति के रूप में देखा जाता है। समाज के प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि पुराने जागीरदारी काल में सामाजिक दबाव और परंपराओं के चलते ऐसे आयोजन किए जाते थे, लेकिन आधुनिक समय में शिक्षा और जागरूकता के बावजूद इस कुरीति का जारी रहना चिंता का विषय है।

समाज के जागृत वर्ग ने सवाल उठाया है कि जब गुरु महाराज के स्पष्ट उपदेश मौजूद हैं, तब भी कुछ लोग रूढ़िवादिता और सामाजिक दबाव के कारण गुरुवाणी की अवहेलना क्यों कर रहे हैं। लेख में यह भी कहा गया कि कुछ असंगठित तत्व और सामाजिक दबाव समाज सुधार के रास्ते में बाधा बन रहे हैं। इसके बावजूद समाज के संत, शिक्षाविद, मातृ शक्ति और युवा वर्ग लगातार सुधार की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

पावन तीर्थ धाम शिकारपुरा के वर्तमान गादीपति महंत श्री श्री 108 श्री दयाराम जी महाराज भी अपने प्रवचनों में मृत्यभोज त्यागने का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने समाज को सादा भोजन, ब्राह्मण सेवा और श्रद्धा के साथ तर्पण कर सादगीपूर्ण तरीके से शोक संस्कार पूर्ण करने की प्रेरणा दी है। संतों का मानना है कि दिखावे और खर्चीली परंपराओं की बजाय समाज को शिक्षा, सेवा और संस्कारों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

समाज के कई बुद्धिजीवियों का कहना है कि गुरुवाणी ही गीता ज्ञान की सच्ची खान है और उसी के अनुरूप जीवन जीना समाज को नई दिशा दे सकता है। सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक जागरूकता के इस संदेश को लेकर समाज में व्यापक चर्चा हो रही है।

Fact Box

विषय: मृत्यभोज कुरीति पर जागरूकता संदेश

समाज: कलबी समाज

मुख्य संदेश: मृत्यभोज त्यागें, गुरुवाणी अपनाएं

प्रमुख संत: श्री राजाराम जी महाराज, श्री दयाराम जी महाराज

स्थान: शिकारपुरा तीर्थ धाम

उद्देश्य: सामाजिक सुधार और जागरूकता

FAQ Section

Q1. मृत्यभोज को क्यों त्याज्य बताया गया है?

गुरुवाणी और समाज सुधारकों के अनुसार यह आर्थिक और सामाजिक रूप से हानिकारक कुरीति है।

Q2. किस समाज में यह संदेश दिया गया?

कलबी समाज में यह जागरूकता संदेश दिया गया है।

Q3. गुरु महाराज ने क्या उपदेश दिया?

गुरुवाणी में मृत्यभोज को त्याग कर सादगीपूर्ण संस्कार अपनाने का संदेश दिया गया है।

Q4. वर्तमान गादीपति कौन हैं?

पावन तीर्थ धाम शिकारपुरा के वर्तमान गादीपति महंत श्री श्री 108 श्री दयाराम जी महाराज हैं।

Q5. समाज को क्या संदेश दिया गया?

रूढ़िवादी कुरीतियों को छोड़कर शिक्षा, सेवा और आध्यात्मिकता को अपनाने की अपील की गई।

निष्कर्ष: कलबी society में मृत्यभोज जैसी कुरीतियों को समाप्त करने की दिशा में यह संदेश एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल माना जा रहा है। संतों और जागरूक समाजजनों द्वारा गुरुवाणी के मार्ग पर चलने की अपील समाज को नई सोच और सकारात्मक दिशा देने का प्रयास है। सामाजिक सुधार, सादगी और आध्यात्मिक जागरूकता ही समाज की वास्तविक शक्ति बन सकती है।

News Source: समाजजनों एवं धार्मिक प्रवचनों के माध्यम से साझा की गई जानकारी।

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