IPS अजय पाल शर्मा विवाद: बंगाल चुनाव में ‘ऑब्जर्वर’ पर सियासी घमासान
- धन्ना राम चौधरी

- 28 अप्रैल
- 3 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच एक नाम ने अचानक सियासी तापमान बढ़ा दिया है—अजय पाल शर्मा। चुनाव आयोग द्वारा बतौर ऑब्जर्वर नियुक्ति के बाद उनका एक कथित वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे टीएमसी उम्मीदवार के परिवार को चेतावनी देते दिख रहे हैं। इस घटना ने विपक्ष को हमलावर बना दिया है। अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की पार्टी ने गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष चुनाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है—क्या यह केवल राजनीतिक शोर है या लोकतंत्र पर गंभीर खतरे का संकेत?
बंगाल चुनाव में नया बवाल: कौन हैं अजय पाल शर्मा?
अजय पाल शर्मा 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, जो उत्तर प्रदेश कैडर से जुड़े रहे हैं। पंजाब मूल के शर्मा का करियर असामान्य रहा—वे पहले एक डेंटिस्ट थे, लेकिन बाद में सिविल सेवा में आकर पुलिस सेवा में शामिल हुए। शामली, रामपुर, जौनपुर और प्रयागराज जैसे जिलों में उनकी पोस्टिंग रही, जहां उन्होंने कानून-व्यवस्था के मामलों में सख्त कार्रवाई की। उनकी पहचान एक ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के रूप में बनी, खासकर जौनपुर में उनके कार्यकाल के दौरान, जहां उनके नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस मुठभेड़ हुईं। समर्थक इसे अपराध पर कड़ा प्रहार बताते हैं, जबकि आलोचक इसे ‘आक्रामक पुलिसिंग’ का उदाहरण मानते हैं।
वायरल वीडियो: विवाद की जड़
पूरा विवाद एक कथित वायरल वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें अजय पाल शर्मा दक्षिण 24 परगना में टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के घर के बाहर उनके परिवार से तीखे लहजे में बात करते नजर आते हैं। वीडियो में वे कथित तौर पर कहते हैं कि “लोगों को धमकाना बंद करें, नहीं तो सख्त कार्रवाई होगी।” विपक्ष का आरोप है कि यह भाषा एक चुनाव पर्यवेक्षक के लिए अनुचित है और इससे चुनाव प्रभावित हो सकता है।
अखिलेश यादव का हमला: ‘एजेंट’ वाला आरोप
अखिलेश यादव ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठा दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर शर्मा को “भाजपा का एजेंट” बताया और आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर बंगाल भेजा गया है।
अखिलेश ने कहा कि
यह निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ है
ऐसे अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए
“एजेंटों के एजेंटों” को कानून के दायरे में लाया जाएगा
उनकी इस टिप्पणी ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया।
TMC का पलटवार: ‘कुख्यात सिंघम’ और दागी रिकॉर्ड
तृणमूल कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। पार्टी ने शर्मा को “कुख्यात सिंघम” बताते हुए आरोप लगाया कि:
वे योगी आदित्यनाथ के करीबी हैं
उनका पिछला रिकॉर्ड विवादों से भरा है
उनकी नियुक्ति निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है
TMC का दावा है कि चुनाव आयोग ने जानबूझकर ऐसे अधिकारियों को चुना है जो सत्ता पक्ष के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
पुराने विवाद भी बने मुद्दा
अजय पाल शर्मा पहले भी कई विवादों में घिर चुके हैं:
एक महिला द्वारा शादी छिपाने और विश्वास भंग का आरोप
2020 में कथित “पोस्टिंग के बदले पैसे” घोटाले में नाम
इन मामलों की जांच के लिए SIT गठित होने की खबरें
हालांकि इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष क्या है, यह अलग मुद्दा है, लेकिन राजनीति में इन्हें हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
सबसे बड़े सवाल जो उठ रहे हैं
इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या चुनाव आयोग की नियुक्तियां पूरी तरह निष्पक्ष हैं?
क्या एक ऑब्जर्वर का व्यवहार चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है?
क्या पुराने विवाद किसी अधिकारी की वर्तमान भूमिका को प्रभावित करने चाहिए?
क्या यह मुद्दा वास्तविक है या केवल राजनीतिक रणनीति?
Q1. अजय पाल शर्मा कौन हैं?
Q2. विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
Q3. अखिलेश यादव ने क्या आरोप लगाए?
Q4. TMC की आपत्ति क्या है?
Q5. क्या इस पर चुनाव आयोग ने प्रतिक्रिया दी?
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