4 महीने तक सैलरी देकर ठगी! बेंगलुरु में पिता-बेटी का करोड़ों का जॉब स्कैम बेनकाब
- धन्ना राम चौधरी

- 10 जून
- 3 मिनट पठन
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 40 से ज्यादा युवाओं से लाखों की ठगी, फर्जी ट्रेनिंग सेंटर और नकली अपॉइंटमेंट लेटर से रचा गया बड़ा खेल

भारतार्थ खबर। बेंगलुरु संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
बेंगलुरु | 10 जून, 2026| सरकारी नौकरी पाने का सपना दिखाकर बेरोजगार युवाओं से करोड़ों की ठगी करने वाले एक सनसनीखेज जॉब स्कैम का खुलासा बेंगलुरु में हुआ है। केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) ने एक शातिर पिता-पुत्री को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने रेलवे, आयकर विभाग और स्वास्थ्य विभाग समेत कई सरकारी संस्थानों में नौकरी दिलाने के नाम पर 40 से अधिक युवाओं को अपना शिकार बनाया। हैरानी की बात यह रही कि आरोपियों ने युवाओं का भरोसा जीतने के लिए चार महीने तक फर्जी सैलरी भी ट्रांसफर की, ताकि किसी को उन पर शक न हो।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान एम.ए. मंसूर अहमद और उनकी बेटी शमशाद बेगम के रूप में हुई है। दोनों खुद को बड़े अधिकारियों और नेताओं का करीबी बताकर बेरोजगार युवाओं और उनके परिवारों को अपने जाल में फंसाते थे। सरकारी नौकरी का लालच देकर उम्मीदवारों से 5 लाख से 10 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने रेलवे, इनकम टैक्स, सिंचाई, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण विभाग जैसे प्रतिष्ठित सरकारी विभागों के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र और भर्ती आदेश जारी किए। इतना ही नहीं, बेंगलुरु, मुंबई और कोलकाता में फर्जी ट्रेनिंग सेंटर तक खोले गए, जहां उम्मीदवारों को ट्रेनिंग देने का नाटक किया जाता था।
इस जॉब स्कैम की सबसे चौंकाने वाली चाल थी ‘सैलरी मॉडल’। जब कुछ युवाओं को नौकरी पर शक हुआ, तब आरोपियों ने अपने खाते से ही उन्हें चार महीने तक नियमित सैलरी भेजी। इससे पीड़ितों का भरोसा और मजबूत हो गया और उन्होंने अपने परिचितों को भी इस नेटवर्क से जोड़ दिया। पुलिस के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के बीच आरोपियों ने 40 से 45 युवाओं से करीब 53 लाख रुपये की ठगी की।
मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ उम्मीदवारों ने नियुक्ति पत्रों की जांच करवाई और वे पूरी तरह फर्जी पाए गए। इसके बाद पीड़ितों ने पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर 17 नवंबर 2025 को मामला दर्ज किया गया था। सीसीबी ने जांच के बाद 4 जून को आरोपी पिता-पुत्री को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अब रेलवे कर्मचारी महेश पात्रा की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिसने कथित तौर पर पीड़ितों की मुलाकात आरोपियों से करवाई थी। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस फर्जीवाड़े में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं।
Fact Box
- आरोपी: एम.ए. मंसूर अहमद और शमशाद बेगम
- स्थान: बेंगलुरु
- पीड़ित: 40 से अधिक बेरोजगार युवा
- ठगी की रकम: करीब 53 लाख रुपये
- फर्जी विभाग: रेलवे, आयकर, स्वास्थ्य, सिंचाई विभाग
- ठगी का तरीका: नकली नियुक्ति पत्र, फर्जी ट्रेनिंग सेंटर, सैलरी ट्रांसफर
- गिरफ्तारी की तारीख: 4 जून 2026
FAQ Section
Q1. बेंगलुरु जॉब स्कैम में कितने लोग ठगी का शिकार हुए?
करीब 40 से 45 बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगा गया।
Q2. आरोपी किस तरह युवाओं को फंसाते थे?
आरोपी खुद को बड़े अधिकारियों और नेताओं का करीबी बताकर फर्जी नियुक्ति पत्र और ट्रेनिंग सेंटर के जरिए भरोसा जीतते थे।
Q3. क्या आरोपियों ने सच में सैलरी दी थी?
हाँ, युवाओं को भरोसे में लेने के लिए आरोपियों ने चार महीने तक फर्जी सैलरी ट्रांसफर की थी।
Q4. पुलिस अब क्या जांच कर रही है?
पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और रेलवे कर्मचारी महेश पात्रा की भूमिका की जांच कर रही है।
निष्कर्ष: बेंगलुरु का यह जॉब स्कैम दिखाता है कि सरकारी नौकरी की चाहत का फायदा उठाकर ठग किस तरह बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहे हैं। फर्जी नियुक्ति पत्र, नकली ट्रेनिंग सेंटर और सैलरी ट्रांसफर जैसी चालों ने इस ठगी को बेहद खतरनाक बना दिया। ऐसे मामलों में युवाओं को सतर्क रहने और किसी भी नौकरी ऑफर की आधिकारिक जांच करने की जरूरत है।
News Source: CCB बेंगलुरु, पुलिस जांच रिपोर्ट और स्थानीय मीडिया सूत्र
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