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भारतार्थ – भारतीय राजनीति गहन विचार पर विशेष


मन पर विजय ही आत्मविकास की पहली सीढ़ी: मुनि श्री वीरसागर जी
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 12 अगस्त 2026। ज्ञानोदय परिसर, इनर रिफ्लेक्शन सेंटर, तुबरहल्ली में चल रहे आध्यात्मिक प्रवचनों के क्रम में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने मन की प्रकृति, नकारात्मक विचारों, आत्मसंयम और सकारात्मक जीवन-दृष्टि पर प्रेरणादायी संदेश दिया। मुनि श्री वीरसागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में वास्तविक आत्मविकास तब शुरू होता है, जब वह यह समझता है कि वह मन नहीं, बल्कि मन का साक्षी और स्वामी है।

धन्नाराम चौधरी
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