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भारतार्थ – भारतीय राजनीति गहन विचार पर विशेष


चुनमुनियाँ - कहानी
लेखक — लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’, 23 अगस्त 2026 आजमगढ़ | रात के करीब आठ बजे थे। घर के बाहर से आती नाच की आवाज और भीतर बर्तनों की खटर-पटर से अचानक मेरी नींद खुल गई। दूर से ढोल-मजीरे की आवाज कानों में साफ सुनाई दे रही थी। घर में लगभग सभी लोग जाग रहे थे।
मैंने बरामदे में देखा तो चाचा जी कपड़े पहनकर कहीं जाने की तैयारी में थे। बाहर दरवाजे पर उनका एक मित्र भी उनका इंतजार कर रहा था।
मैंने पूछा—
“चाचा जी, कहीं जा रहे हो क्या?” वे बनावटी गुस्से में बोले— नहीं तो!” मैंने फिर कहा— “चाचा

Ashok kumar Singh
23 अग॰9 मिनट पठन
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