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भारतार्थ – भारतीय राजनीति गहन विचार पर विशेष


पुस्तक समीक्षा - "काले अक्षर कविता और कवि" काव्य संग्रह
समीक्षक - लालबहादुर चौरसिया 'लाल'
महामंत्री - विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी, आज़मगढ़ इकाई
"वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान,
उमड़कर आँखों से चुपचाप बही होगी कविता अनजान।"
महाकवि सुमित्रानंदन पंत जी की इन पंक्तियों को जब मैं पढ़ता हूँ और इसकी गहराई में जाता हूँ, तो अनेक कवियों की छाया मेरे अंतःपटल पर अंकित हो उठती है। ऐसे कवि सिर्फ़ समाज के लिए अवतरित होते हैं। समाज की पीड़ा और आह्लाद उनकी कविताओं में निहित होता है। उन्हीं कवियों में एक हैं साहित्यकार श्री

Ashok kumar Singh
3 दिन पहले4 मिनट पठन
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