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भारतार्थ – भारतीय राजनीति गहन विचार पर विशेष


अहंकार छोड़िए, शांति पाइए: मुनि श्री वीर सागर ने बताए 3 सूत्र
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 09 अगस्त 2026 बेंगलुरु। अहंकार मनुष्य की आत्मिक शांति और आत्मविकास का सबसे बड़ा अवरोध बन सकता है। निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज ने रविवार को प्रेरणादायी प्रवचन में अहंकार से मुक्ति का सरल और व्यावहारिक मार्ग बताते हुए कहा कि शरीर, पद, प्रतिष्ठा और संपत्ति को ही अपना वास्तविक स्वरूप मान लेना मनुष्य की बड़ी भूल है। इसी मिथ्या पहचान से ‘मैं’ और ‘मेरा’ का भाव जन्म लेता है और धीरे-धीरे अहंकार व्यक

धन्नाराम चौधरी
10 अग॰4 मिनट पठन
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