top of page
_edited.jpg)
भारतार्थ – भारतीय राजनीति गहन विचार पर विशेष


पुस्तक समीक्षा : "ऐ नाविक! थोड़ा ठहरो ना"
कवयित्री - सरोज यादव , समीक्षक - लालबहादुर चौरसिया लाल
महामंत्री -विश्व हिंदी शोध एवं संवर्धन अकादमी आजमगढ़ इकाई
"ऐ नाविक! थोड़ा ठहरो ना" काव्य-संग्रह आज़मगढ़ की प्रतिष्ठित कवयित्री श्रीमती सरोज यादव जी की अनुपम काव्य-कृति ही नहीं, वरन् विविध रंगों के फूलों से सजा एक अनुपम गुलदस्ता है। काव्यानुभूति की व्यापकता से परिपूर्ण कवयित्री सरोज जी की यह पुस्तक लोकमंगल, लोकरंजन व लोकरक्षण से परिपूर्ण मानवीय मूल्यों का उद्बोधन करती है तथा संपूर्ण मानव-जगत को नए-नए आयाम देने के प्रति

Ashok kumar Singh
4 दिन पहले3 मिनट पठन
bottom of page