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भारतार्थ – भारतीय राजनीति गहन विचार पर विशेष


चिंता, भय और क्रोध से मुक्ति का मार्ग: मुनि श्री वीरसागर जी ने बताया ‘वस्तु स्वरूप विचार’ का सूत्र
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 13 अगस्त, 2026 बेंगलुरु। चिंता, भय, क्रोध और अहंकार से जूझ रहे मनुष्य को वास्तविक शांति बाहर नहीं, बल्कि अपनी दृष्टि और भावनाओं में परिवर्तन से मिल सकती है। जीवन-परिवर्तन एवं आत्मविकास की निरंतर चल रही प्रवचनमाला में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने भावनात्मक अशांति के मूल कारणों पर गहन प्रकाश डालते हुए ‘वस्तु स्वरूप विचार’ को आत्मपरिवर्तन और स्वीकारभाव की दिशा में प्रभावी आध्यात्मिक मार्ग

धन्नाराम चौधरी
14 अग॰4 मिनट पठन
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