top of page
_edited.jpg)
भारतार्थ – भारतीय राजनीति गहन विचार पर विशेष


‘विनय का चमत्कार’: मुनि वीरसागर जी ने बताया आंतरिक बंधनों से मुक्ति का मार्ग
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 14 अगस्त, 2026 बेंगलुरु। चिंता, क्रोध, भय, मोह और अहंकार से जूझ रहे मनुष्य को वास्तविक शांति और आंतरिक स्वतंत्रता का मार्ग दिखाते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने ‘विनय का चमत्कार’ विषय पर प्रेरणादायी प्रवचन दिया। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा बंधन हमेशा बाहर नहीं होता, बल्कि कई बार उसके अपने विचार, भावनाएं, अपेक्षाएं और अहंकार उसे अदृश्य बंधनों में जकड़ देते हैं। विनय का भाव

धन्नाराम चौधरी
14 अग॰4 मिनट पठन
bottom of page